पलामू किला जहां की दीवारों से आज भी सुनाई देती है, घोंडों की टाप व किसी के चलने की आहट……

पलामू किला जहां की दीवारों से आज भी सुनाई देती है, घोंडों की टाप व किसी के चलने की आहट……

पलामू किला जो लातेहार जिले में अवस्थित है, जहां पर प्रतिवर्ष हजारों पर्यटक घुमने आते हैं। इस किले को समझने की कोशिश करते है, तो जंगल की बीचो बीच अवस्थित है, एकदम शांत व चित अवस्था में किला लोगों से कुछ कहना चाहती है। इस किला में जो लेख है जिसे अब तक नही पढा गया। इस किले में चेरोवंश के अंतिम शासक राजा चूडामन राय व उनकी पत्नी चंद्रवती देवी प्रतिमा स्थापति की गयी है। इस किले में एक गुप्त मार्ग हो आज तक अनसुलझी पहेली है। इस किले का निर्माण 1766.1770 के बीच चेरो वंश के राजा गोपाल राय ने करवाया था। इस किले का अंतिम शासक राजा मेदिनी राय हुए, जो चेरों वंश होने का प्रमाण है।

मुगल का आक्रमण व अंग्रेजों का कब्जा
झारखंड का पलामू किला जिस पर मुगलों का हमला व अंग्रजों का कब्जा होेने का प्रमाण है। किला का इतिहास बडा ही गौरवशाली रहा है। जब मुगलों ने हमला किया लेकिन किले को फतह नहीं कर पाये। इसके बाद अंग्रेज आक्रमणकारियों ने इसे जीता व कब्जा किया। फिलहाल यह किला पलामू टाईगर रिर्जव वन संरक्षण क्षेत्र में स्थापित है।
पलामू किला पत्थरों से निर्मित है, जो अब जर्जर हो चुका है, लेकिन यहां की आबो हवा कुछ कहती है, दीवारें कुछ बताना चाहती है, यहां आप आते हैं, यदि आप दीवारो पर कान रख कर सुनेंगे तो किसी के होने का अहसास होगा।
म्ंादिर व गुप्त स्थल जहां नरबलि देने की लोक कथा प्रचलित है। अंदर एक कुआं है किले के नीचला हिस्सा में जिसमें राजाओं की सभास्थल होने का प्रमाण है। दीवार इतना चैडा है कि दो बसें एक साथ गुजर सकती है।
शाम होते ही दीवारें कुछ बोलती है….
स्थानीय लोग कहते हैं कि शाम होते ही किले कि दीवार पर घोडों की चलने की टाप सुनाई देता है। ऐसा लगता है कि राजा की सुरक्षा में अभी सेना लगी हुई है।

किला तय करता है कि आपकों किस रास्ते जाना है…..
पलामू किला एक ऐसा किला है, जो आपको अंदर जाने का फैसला खुद तय करता है कि आप किस रास्ते जाना है। किले के अंदर जाने के लिए दो रास्ता है, जिसे आप तय नही करते किला तय करता है कि आपको किस रास्ते जाना है। यदि आप सीढियों के रास्ते गये तो बडी लंबी चैडी दीवारे मिलेंगी, जहां से घोडों से गस्त कर किले की सुरक्षा किया जाता था। यदि किले के सीधे रास्ते पर गये तो एक कुंआ व एक मंदिर मिलेगा साथ ही एक गोलस्तूप जहां राजाओं की सभा लगने की बात कही जाती है। कुछ लोक कथाओं के अनुसार गोलस्तूप पर नरबलि देने की बात कही जाती है।
यदि आप कुछ देर किले का भ्रमण करेंगे ,तो ऐसा प्रतीत होगा कि आप राजा के दरबार हो, जो वर्तमान में भी चल रहा है। हां ये बात जरुर है शाम होते ही आपको डर का अहसास भी होगा। दीवारों पर कान लगाकर सुनेंगे तो पता चला कि कोई है, जो अभी भी चल रहा है। किसी के होने का अहसास होगा।
बेआबरु हो जाती है, हवा—-
किले की दीवारों से आप जंगल के विभिन्न हिस्सों को निहार पाते हैं। कुछ देर बिताने के बाद आपके अंदर से एक आवाज आएगा कि आपको अब वहां नहीं रहना चाहिए। शाम होते ही हवा की रुख बेआबरु हो जाती है, लोगों से कुछ कहना चाहती हो। किला के अंदर एक कुंआ है, जिसे देखते ही डर महसूस होगा है, कुंआ पूरा तरह से सूखा हुआ है।
अनसुलझी लिपी
जमीन के नीचे ताला लगा हुआ कमरा है, जिसे छेडना मना है। किले के अंदर पत्थरों पर अनसुलझी लिपि में कुछ लिखा हुआ है, जो लोगों से सुलझाने व समझने के इंतजार में है। ताकि कुछ रहस्यों से पर्दा उठ सके।

अंगेजों ने राजा गोपाल राय को हराया
पलामू किले को 1771 में अंगेजों ने जीता था, उन्होंने चेरो राजवंश के राजा गोपाल राय को हराया था। 1771 में कैप्टन कैमक के नेतृत्व में अंगेजों ने पालमू किले पर हमला किया और किले को खाली करा दिया। लेकिन विद्रोह नहीं हो, इसके लिए गोपाल को पुनः गद्दी पर बैठाया।

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