रांची: झारखंड में कुड़मी समाज ने अपने अधिकारों की मांग को लेकर बड़ा रेल टेका आंदोलन शुरू कर दिया है। पारसनाथ स्टेशन और आसपास के ट्रैक को पूरी तरह जाम कर दिया गया, जिससे दिल्ली–भुवनेश्वर राजधानी एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनें रद्द या रोकी गईं।
आंदोलन का उद्देश्य स्पष्ट है: कुड़मी जाति को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देना और कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराना। इसके लिए राज्य के विभिन्न हिस्सों में हजारों लोग रेलवे ट्रैक और स्टेशन पर जुटे हैं।
आंदोलन और प्रशासन:
रांची जिला प्रशासन ने 5 प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर निषेधाज्ञा लागू की है: मूरी, गोमो, नीमडीह, घाघरा और चांडिल।
रेलवे ने RPF और GRP के माध्यम से सुरक्षा बढ़ा दी है और प्रभावित ट्रेनों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाई है।
आंदोलनकारी नेता अमित महतो का कहना है कि लगभग 20,000 लोग इस प्रदर्शन में शामिल हैं और यह पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा।
प्रमुख मांगें:
- कुड़मी जाति को ST दर्जा।
- कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करना।
- पंचायती राज (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम का सही पालन।
- झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में कुड़मी भूमि और अधिकारों की रक्षा।
ट्रेन परिचालन पर असर:
रेलवे ने बताया कि राजधानी एक्सप्रेस को पारसनाथ से पहले चौधरीबांध स्टेशन पर रोकना पड़ा। इसके अलावा, कई लोकल और लंबी दूरी की ट्रेनों को डायवर्ट या रद्द किया गया। यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।
निष्कर्ष:
कुड़मी समाज का यह आंदोलन उनके अधिकारों और पहचान की रक्षा का प्रतीक है। प्रशासन और रेलवे ने सुरक्षा और ट्रेन परिचालन के लिए पर्याप्त इंतजाम किए हैं।
आंदोलन शांतिपूर्ण होने का दावा करता है, लेकिन इसका असर आने वाले दिनों में रेल परिचालन और स्थानीय जनजीवन पर देखा जा सकता है।
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