नई दिल्ली: भारतीय सिनेमा के प्रेमियों के लिए खुशी की खबर है। नीरज घेवान की फ़िल्म ‘होमबाउंड’ को इस बार ऑस्कर 2026 के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री के तौर पर चुना गया है। यह फ़िल्म अब एवार्ड्स की दुनिया में ‘बेस्ट इंटरनेशनल फ़ीचर’ कैटेगरी में भारत का प्रतिनिधित्व करेगी।
फ़िल्म फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि “हमें गर्व है कि यह फ़िल्म भारत का प्रतिनिधित्व करेगी।” इस घोषणा के बाद फ़िल्म जगत में खुशी की लहर दौड़ गई।
‘होमबाउंड’ वह फ़िल्म है जिसके लिए कान फ़िल्म फ़ेस्टिवल में नौ मिनट तक तालियाँ बजी थीं। इसे सिर्फ कान ही नहीं, बल्कि कई अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म फ़ेस्टिवल में सराहना मिली है।
फ़िल्म के निर्देशक नीरज घेवान ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा,
“होमबाउंड को बेस्ट इंटरनेशनल फ़िल्म कैटेगरी में भारत की ओर से ऑस्कर नामांकन के लिए भेजा जाना मेरे लिए बेहद सम्मान की बात है। इस फ़िल्म की जड़ें हमारी धरती और हमारे देश के प्रति प्रेम में जुड़ी हैं। इसमें हम सबके साझा किए गए घरों की खुशबू है। विश्व पटल पर हमारी कहानियों को पेश करना गर्व की बात है और इसके लिए मैं बेहद शुक्रगुज़ार हूँ।”
ऑस्कर दौड़ में मुकाबला
भारत की ओर से ऑस्कर में एंट्री के लिए कुल 24 फ़िल्मों ने आवेदन किया था। इनमें 10 हिंदी फ़िल्में, 6 मराठी, 5 तेलुगू, 1 कन्नड़, 1 मणिपुरी और 1 साइलेंट फ़िल्म शामिल थीं।
फ़िल्म समीक्षक असीम छाबड़ा के मुताबिक, नीरज घेवान की यह फ़िल्म भारतीय सिनेमा में एक नई दिशा और कहानी कहने का साहस दिखाती है।
मसान से होमबाउंड तक: घेवान की सिनेमा यात्रा
साल 2010 में नीरज घेवान ने मसान फ़िल्म से कान फ़िल्म फ़ेस्टिवल में डेब्यू किया था। बनारस की पृष्ठभूमि में रची-बसी यह कहानी प्रेम, दु:ख और जातिवाद में जकड़ी ज़िंदगी की झलक दिखाती है।
फ़िल्म में विक्की कौशल ने मुख्य किरदार निभाया था, जो जाति व्यवस्था की निचली श्रेणी से आता है और उसका परिवार गंगा किनारे शवों का दाह संस्कार करने का काम करता है।
मसान को कान फ़िल्म फ़ेस्टिवल में ‘अन सर्टन रिगार्ड’ कैटेगरी में दिखाया गया था, जिसमें ऐसे फ़िल्मों को शामिल किया जाता है जो कुछ अलग और नई तरह की कहानियाँ पेश करती हैं। इस फ़िल्म ने Promising Future Prize भी अपने नाम किया था।
होमबाउंड: कोविड से प्रेरणा
नीरज घेवान पिछले कई सालों से भारत के हाशिये पर पड़े तबकों की कहानियाँ पेश करने की तलाश में थे। पांच साल पहले कोविड महामारी के दौरान उनके दोस्त सोमेन मिश्रा ने उन्हें न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित एक आर्टिकल ‘Taking Amrit Home’ पढ़ने की सलाह दी। यह आर्टिकल पत्रकार बशारत पीर ने लिखा था। सोमेन मिश्रा, जो कि धर्मा प्रोडक्शंस में क्रिएटिव डेवलपमेंट हेड हैं, ने घेवान को यह कहानी बड़े पर्दे पर लाने की प्रेरणा दी।
समीक्षकों और दर्शकों की तारीफ़
‘होमबाउंड’ को कान सहित कई फ़िल्म फ़ेस्टिवल में सराहा गया है। आलोचक इसे भारतीय कहानियों को वैश्विक मंच पर ले जाने वाली फ़िल्म कहते हैं। दर्शक और फ़िल्म प्रेमी इसे भारत का गर्व मान रहे हैं।
नीरज घेवान की फ़िल्में हमेशा से सामाजिक संदेश और भावनाओं की गहराई के लिए जानी जाती रही हैं। इस बार भी उन्होंने घर, परिवार और इंसानियत की खुशबू को बड़े पर्दे पर बखूबी पेश किया है।
फ़िल्म का महत्व
‘होमबाउंड’ केवल एक फ़िल्म नहीं, बल्कि भारत की कहानियों, संस्कृति और जज़्बात का प्रतिनिधित्व करती है। इसे ऑस्कर के मंच पर भेजना न केवल नीरज घेवान के लिए बल्कि पूरे भारतीय सिनेमा के लिए गर्व की बात है।
नीरज ने कहा,
“हमारी कहानियों को विश्व पटल पर ले जाने और सिनेमा के सबसे बड़े मंचों में इसका प्रतिनिधित्व करना हमारे लिए गर्व की बात है।”
संक्षेप में, नीरज घेवान की ‘होमबाउंड’ ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का मान बढ़ाया है। इसकी सफलता दर्शाती है कि अच्छी कहानी, प्रामाणिक भावनाएँ और सच्चा सिनेमा किसी भी सीमा को पार कर सकता है।
भारत इस फ़िल्म के साथ ऑस्कर की दौड़ में कदम रख रहा है और पूरी फ़िल्म इंडस्ट्री इसे लेकर उत्साहित है।
Views: 219
