बेगूसराय, 4 नवंबर:
झारखंड और बिहार की सीमाओं से सटे बेगूसराय जिले की साहेबपुर कमाल विधानसभा सीट एक बार फिर सियासी सुर्खियों में है। यह सीट कुर्मी-धनुक और ‘माई’ (मुस्लिम-यादव) समीकरण के कारण लंबे समय से राजद और जदयू के बीच राजनीतिक मुकाबले का केंद्र रही है।
2008 के परिसीमन से पहले यह इलाका बलिया विधानसभा क्षेत्र के नाम से जाना जाता था। परिसीमन के बाद इसका नाम बदलकर साहेबपुर कमाल विधानसभा रखा गया। 2024 के लोकसभा चुनाव में इस विधानसभा क्षेत्र में 2,76,904 मतदाता थे, जबकि हालिया मतदाता सूची पुनरीक्षण के बाद अब 2,55,536 मतदाताओं का नाम ड्राफ्ट रोल में दर्ज है।
साहेबपुर कमाल का चुनावी इतिहास
इस सीट का चुनावी इतिहास उतार-चढ़ाव भरा रहा है —
- 2000 के विधानसभा चुनाव में राजद के श्री नारायण यादव ने जीत दर्ज की थी।
- 2005 (नवंबर) में जदयू ने पहली बार उद्योगपति जमशेद अशरफ को उम्मीदवार बनाया, जिन्होंने नारायण यादव को 18,000 से अधिक वोटों से हराया था।
- 2010 में, अशरफ के इस्तीफे के बाद जदयू की प्रवीण अमानुल्लाह मैदान में उतरीं और उन्होंने भी नारायण यादव को 11,111 मतों से पराजित किया।
इसके बाद 2014 के उपचुनाव में परवीन अमानुल्लाह के जदयू छोड़ने पर राजद ने फिर नारायण यादव को टिकट दिया, जिन्होंने भाजपा के शशिकांत कुमार उर्फ अमर कुमार सिंह को शिकस्त दी।
2015: राजद का जोरदार प्रदर्शन
2015 के विधानसभा चुनाव में राजद के श्री नारायण यादव ने लोजपा के मोहम्मद असलम को बड़े अंतर से हराया।
- नारायण यादव को 78,225 वोट
- मोहम्मद असलम को 32,751 वोट मिले,
यानि 45,474 मतों से राजद ने शानदार जीत दर्ज की।
2020: नई पीढ़ी की एंट्री
2020 के विधानसभा चुनाव में नारायण यादव की उम्र और तबीयत को देखते हुए राजद ने उनके बेटे सदानंद संबुद्ध उर्फ ललन यादव को मैदान में उतारा।
ललन यादव ने जदयू के अमर कुमार सिंह को 14,225 वोटों से हराकर सीट बरकरार रखी।
- ललन यादव को 64,888 वोट
- अमर कुमार सिंह को 50,663 वोट मिले।
लोकसभा समीकरण
लोकसभा स्तर पर, बेगूसराय सीट से 2019 और 2024 दोनों चुनावों में भाजपा के गिरिराज सिंह को साहेबपुर कमाल क्षेत्र से बढ़त मिली। इससे यह स्पष्ट है कि विधानसभा स्तर पर जहां राजद और जदयू में कड़ा मुकाबला है, वहीं लोकसभा स्तर पर भाजपा का प्रभाव लगातार बढ़ा है।
साहेबपुर कमाल विधानसभा की सामाजिक संरचना और बदलते राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए यह सीट 2025 के चुनाव में भी राजद-जदयू की टक्कर का मुख्य रणक्षेत्र बनने जा रही है।
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