सरस मेला बना महिला सशक्तिकरण की मिसाल, पहले ही वीकेंड में 1.5 करोड़ की बिक्री

सरस मेला बना महिला सशक्तिकरण की मिसाल, पहले ही वीकेंड में 1.5 करोड़ की बिक्री

बिहार की राजधानी पटना के गांधी मैदान में आयोजित बिहार सरस मेला के पहले रविवार को जबरदस्त रौनक देखने को मिली। कमजोर वर्ग की महिलाओं को उद्यमिता के जरिए आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से लगे इस मेले में देशभर की कला, संस्कृति और स्वाद का अनोखा संगम देखने को मिला। पहले ही वीकेंड में 80 हजार से अधिक लोगों की भीड़ उमड़ी और महज दो दिनों में 1.5 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिक्री दर्ज की गई।

यह मेला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़ी महिलाओं के लिए एक बड़ा मंच बनकर उभरा है। बिहार के सभी 38 जिलों से आईं 209 जीविका दीदियों के साथ-साथ देश के 24 राज्यों की 76 महिला उद्यमी इस मेले में हिस्सा ले रही हैं। कुल मिलाकर 500 से अधिक स्टॉल पर हस्तशिल्प, हथकरघा, पारंपरिक परिधान और क्षेत्रीय व्यंजनों की भरपूर झलक देखने को मिल रही है।

25 लाख की पेंटिंग बनी आकर्षण का केंद्र
मेले में शेखपुरा की कृष्णा देवी का स्टॉल खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। तंजौर चित्रकला में दक्ष कृष्णा देवी ने 22 कैरेट सोने की पन्नी और अर्ध-कीमती पत्थरों से बनी लक्ष्मी देवी की पेंटिंग प्रदर्शित की है, जिसकी कीमत 25 लाख रुपये है। उन्होंने बताया कि महामारी से पहले चेन्नई में मजदूरी करते हुए उन्होंने यह कला सीखी और सरकारी ऋण की मदद से अपना व्यवसाय शुरू किया। चौथी बार सरस मेला में भाग ले रहीं कृष्णा देवी ने बताया कि पिछले साल मेले के दौरान उन्होंने 12 लाख रुपये की बिक्री की थी।

मणिपुर से जयपुर तक, एक मंच पर देश की विविधता
मेले का दायरा बिहार तक सीमित नहीं है। मणिपुर की हथकरघा कारीगर नौचा लगातार तीसरे साल अपने शीतकालीन उत्पादों के साथ पटना पहुंची हैं। 150 रुपये के कोस्टर से लेकर 2,200 रुपये तक के शॉल बेचने वाली नौचा कहती हैं, “पटना आना मुझे अच्छा लगता है, यह दूसरे बड़े शहरों जितना ही सुरक्षित है।” उन्होंने बताया कि मणिपुर में हिंसा का उनके व्यवसाय पर असर पड़ा है और ऐसे मेले ही उनकी आजीविका का बड़ा सहारा हैं।

दिल्ली की एसएचजी सदस्य करुणा कुमारी, जो सूट का व्यवसाय करती हैं, ने कहा कि सरस मेला उन्हें सीधे बाजार से जोड़ता है और प्रशिक्षण व ऋण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराता है। वहीं जयपुर के फरीदी ने बताया कि पारंपरिक रजाई का उनका पारिवारिक व्यवसाय इस मेले के जरिए सालाना आय का बड़ा हिस्सा अर्जित करता है।

आगंतुकों ने की सराहना
मेले में पहुंचे लोग भी इस पहल से खासे प्रभावित नजर आए। बोरिंग रोड की रहने वाली अंजली ने कहा कि एक ही स्थान पर देशभर की कला देखना और महिलाओं को सीधे समर्थन देना बेहद खुशी की बात है। पाटलिपुत्र के राजेश कुमार ने उत्पादों की गुणवत्ता की सराहना करते हुए कहा कि आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल कर रही इन महिलाओं की कहानियां सचमुच प्रेरणादायक हैं।

सरस मेला न सिर्फ खरीदारी का केंद्र बना है, बल्कि यह महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और भारत की सांस्कृतिक विविधता का जीवंत उदाहरण भी बनकर उभरा है।

Views: 142

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

TOTAL VISITOR: 50219322