सिंगापुर से सनसनीखेज खबर: भारतीय मूल के अधिकारी कन्नन मॉरिस राजगोपाल जयराम ने विदेश में देश का नाम शर्मसार कर दिया है। सिंगापुर की कोर्ट ने 55 साल के इस इमिग्रेशन इंस्पेक्टर को 22 महीने की जेल की सजा सुनाई है। आरोप है कि कन्नन ने वीज़ा और ट्रैवल पास अप्रूवल के बदले विदेशी applicants, खासकर युवा भारतीय छात्रों से यौन शोषण जैसी घिनौनी मांगें कीं।
कन्नन की करतूतें:
कन्नन मॉरिस राजगोपाल जयराम, जो सिंगापुर की Immigration and Checkpoints Authority (ICA) में वीज़ा और शॉर्ट-टर्म ट्रैवल पास के आवेदन जांचने और मंजूरी देने का काम करते थे, ने इस पद का दुरुपयोग कर घिनौनी मांगें कीं। कई बार उसने पढ़ाई या घूमने आए युवाओं का शोषण किया, जिन्हें वह वीज़ा या ट्रैवल पास देने के नाम पर दबाव में रखता था।
पिछले मामले और सजा:
यह पहली बार नहीं है जब कन्नन की गैरकानूनी हरकतें पकड़ी गई हैं। 2022 और 2023 में उसके खिलाफ कम से कम तीन मामलों में कार्यवाही की गई थी और उसे पहले भी सजा मिली थी। खास बात ये है कि ज्यादातर पीड़ित भारतीय छात्र थे, जिनकी उम्र 25 से 30 वर्ष के बीच थी और जो उच्च शिक्षा के लिए सिंगापुर आए थे।
ICA की कार्रवाई:
ICA ने बताया कि कन्नन के खिलाफ नया केस अप्रैल 2023 में दर्ज किया गया था, जिसके बाद उसे तुरंत ड्यूटी से सस्पेंड कर दिया गया था। अब 11 सितंबर 2025 को कोर्ट ने उसे कड़ी सजा दी है, जिससे यह साफ हो गया है कि सिंगापुर में कानून के साथ किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विदेश में भारतीयों का यह बुरा नाम:
इस घटना ने भारतीय समुदाय के लिए शर्मिंदगी का माहौल पैदा कर दिया है। ऐसे मामलों से विदेशों में देश का नाम धूमिल होता है और विश्वसनीयता को ठेस पहुंचती है।
क्या आपको लगता है कि इस घटना से विदेशों में भारतीयों की इमेज प्रभावित होगी? या यह एक isolated घटना है? आपके विचार जानना दिलचस्प रहेगा!
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