बिहार के चर्चित सृजन घोटाले में सात वर्षों बाद बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है। सामान्य प्रशासन विभाग ने पूर्व प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) चंद्रशेखर झा की पेंशन जब्त कर ली है। यह पहली बार है जब राज्य सरकार ने इस मामले में किसी वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ इतनी कठोर कदम उठाया है। इस आदेश के बाद झा को अब किसी भी प्रकार की पेंशन राशि नहीं मिलेगी।
CBI चार्जशीट से खुली परतें
2017 में सामने आए सृजन घोटाले में करोड़ों की सरकारी राशि को अवैध तरीके से सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड, सबौर के खातों में ट्रांसफर किया गया था। जांच के दौरान CBI ने 2018 में इस मामले में केस दर्ज किया। इसके बाद कई स्तरों पर हुई जांच में तत्कालीन BDO चंद्रशेखर झा की भूमिका संदिग्ध पाई गई।
CBI द्वारा दायर की गई चार्जशीट में यह स्पष्ट किया गया कि झा ने सरकारी सेवक रहते हुए अपनी तैनाती की अवधि में सरकारी मदों से ₹4,52,88,246 की राशि अवैध रूप से निकालकर साजिश के तहत सृजन समिति के खाते में भेजी। विभाग ने CBI की इसी चार्जशीट को कार्रवाई का आधार बनाया।
कानून विभाग ने पिछले वर्ष 4 अक्टूबर 2024 को अभियोजन की स्वीकृति दे दी थी, जिससे कार्रवाई की दिशा साफ हो गई थी। इसके बाद मामला सामान्य प्रशासन विभाग तक पहुँचा और विस्तृत जांच व स्पष्टीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई।
पत्नी के नाम फ्लैट का भुगतान भी जांच के दायरे में
CBI जांच में यह भी सामने आया कि चंद्रशेखर झा ने अवैध रकम का उपयोग निजी लाभ के लिए किया। आरोपों के अनुसार झा ने अपनी पत्नी बबीता झा के नाम गाजियाबाद के वसुंधरा क्षेत्र में स्थित एक फ्लैट का भुगतान सृजन से जुड़े अवैध लेनदेन के जरिए कराया था। जबकि सृजन संस्था को बैंकिंग से जुड़े कार्यों की अनुमति कभी प्राप्त नहीं थी। इससे यह स्थापित हुआ कि अधिकारी ने पद का दुरुपयोग करते हुए व्यक्तिगत संपत्ति अर्जित की।
सरकार द्वारा जारी आदेश की प्रतिलिपि CBI, भागलपुर जिला प्रशासन और झा के धनबाद स्थित वर्तमान पते पर भी भेज दी गई है।
जांच के बाद बढ़ी कार्रवाई की रफ्तार
CBI की रिपोर्ट में झा की भूमिका सामने आने के बाद इस वर्ष 12 जुलाई को जिलाधिकारी ने सामान्य प्रशासन विभाग को चार्जशीट भेजी थी। इसके बाद विभाग ने झा से लिखित स्पष्टीकरण मांगा। विभाग के अनुसार उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद विभागीय नियमों के तहत अधिकतम दंडात्मक कार्रवाई करते हुए उनकी पेंशन को पूर्ण रूप से जब्त करने का आदेश जारी किया गया।
सृजन घोटाले में सरकार की सख्ती का संकेत
सृजन घोटाला बिहार के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक माना जाता है, जिसमें करोड़ों की सरकारी राशि फर्जी तरीके से एनजीओ के खातों में स्थानांतरित की गई थी। वर्षों से जांच चल रही थी, लेकिन उच्च स्तर पर कार्रवाई सीमित थी। चंद्रशेखर झा की पेंशन जब्ती को इस घोटाले में सरकार की ओर से की गई पहली निर्णायक कार्रवाई माना जा रहा है।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि जांच के अन्य मामलों में भी विभाग इसी तरह आवश्यक कार्रवाई करेगा। इस निर्णय ने स्पष्ट किया है कि सृजन घोटाले में शामिल पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।
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