बच्चे के जीवन का छठा महीना बेहद अहम माना जाता है। इसी उम्र में शिशु धीरे-धीरे मां के दूध या फॉर्मूला दूध के साथ ठोस आहार (Weaning Food) लेना शुरू करता है। ऐसे में सही खानपान, साफ-सफाई और विकासात्मक गतिविधियों का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है।
- दूध पिलाना
6 महीने तक मां का दूध ही शिशु का मुख्य आहार होना चाहिए।
यदि किसी कारणवश मां का दूध उपलब्ध नहीं है, तो डॉक्टर की सलाह से फॉर्मूला दूध दिया जा सकता है।
- ठोस आहार की शुरुआत (Weaning)
शुरुआत बहुत हल्के और नरम भोजन से करें।
पहले दिन में एक बार, फिर धीरे-धीरे 2–3 बार ठोस आहार दें।
हर नए भोजन को 3–4 दिन तक देकर देखें कि बच्चे को एलर्जी तो नहीं हो रही।
? क्या खिलाएँ:
चावल का पानी, दाल का पानी
सूजी/रवा का पतला दलिया
केले, सेब या पपीते का मैश किया हुआ गूदा
उबला व मैश किया हुआ आलू या गाजर
रागी का हलवा या खिचड़ी
- सफाई और सुरक्षा
खाने से पहले और बाद में बच्चे के हाथ और बर्तन साफ़ रखें।
खाना हल्का गुनगुना और पतला होना चाहिए।
नमक, चीनी, शहद और मसाले 1 साल से पहले न दें।
- विकास और खेल
बच्चे को पेट के बल (tummy time) खिलाएँ ताकि मांसपेशियां मजबूत हों।
बच्चे से बातें करें और खिलौनों से खेलने दें ताकि उसका मानसिक विकास हो।
बच्चे को सहारे के साथ बैठने की प्रैक्टिस करवाएँ।
- स्वास्थ्य
समय पर टीकाकरण करवाना न भूलें।
यदि बच्चे को बार-बार उल्टी, दस्त या भूख कम लगे तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
निष्कर्ष:
6 महीने का बच्चा तेज़ी से बढ़ता और सीखता है। ऐसे में उसकी सही डाइट, साफ-सफाई और खेलकूद का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। मां-बाप यदि थोड़ी जागरूकता और धैर्य रखें, तो बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास सही दिशा में होगा।
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