बिहार में टीबी मरीजों की बढ़ती संख्या, गरीबी और कुपोषण बने सबसे बड़े कारण

बिहार में टीबी मरीजों की बढ़ती संख्या, गरीबी और कुपोषण बने सबसे बड़े कारण

पटना, 3 सितम्बर 2025
बिहार में क्षय रोग (टीबी) के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, राज्य में हर साल हज़ारों नए मरीज सामने आते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि गरीबी, कुपोषण, भीड़भाड़ और जागरूकता की कमी इसके मुख्य कारण हैं।

गरीबी और कुपोषण से बिगड़ रही स्थिति
बिहार के ग्रामीण और शहरी गरीब परिवारों में पौष्टिक भोजन की भारी कमी है। कुपोषण के कारण लोगों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है और उन्हें संक्रमण जल्दी हो जाता है।

भीड़भाड़ और प्रदूषण भी बड़ा कारण
राज्य में जनसंख्या घनत्व बहुत अधिक होने से बीमारी तेजी से फैलती है। धूल, गंदगी और प्रदूषण भी फेफड़ों को कमजोर करते हैं। इसके अलावा धूम्रपान और शराब जैसी आदतें टीबी को और खतरनाक बना रही हैं।

इलाज अधूरा छोड़ने से खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि कई मरीज इलाज अधूरा छोड़ देते हैं, जिससे दवा-प्रतिरोधी टीबी (Drug Resistant TB) के केस भी बढ़ रहे हैं। पलायन करने वाले मजदूर अक्सर इलाज बीच में रोक देते हैं और संक्रमण दूसरों तक फैलाते हैं।

जागरूकता जरूरी
डॉक्टरों के अनुसार, लगातार खांसी, बलगम में खून, वजन घटना और बुखार जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच और मुफ्त दवा सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध है।

निष्कर्ष:
बिहार में टीबी पर रोक लगाने के लिए लोगों को पोषण, जागरूकता और समय पर इलाज पर ध्यान देना होगा। साथ ही सरकार को ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को और मज़बूत करना होगा।

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