अनंत सिंह बनाम अशोक महतो: मुंगेर सीट पर जातीय जंग

अनंत सिंह बनाम अशोक महतो: मुंगेर सीट पर जातीय जंग

मुंगेर लोकसभा सीट का चुनावी रण इस बार महज जेडीयू बनाम आरजेडी की लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरी तरह कुर्मी बनाम भूमिहार की जंग में तब्दील हो चुका है। दोनों खेमों में बाहुबली अपने-अपने समाज के लिए पर्दे के पीछे से मोर्चा संभाले हुए हैं।—अनंत सिंह की इंडायरेक्ट एंट्री से ट्विस्टजेडीयू प्रत्याशी और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के समर्थन में जेल से बाहर आकर बाहुबली अनंत सिंह चुनावी फील्डिंग सजा रहे हैं।

लालू प्रसाद यादव के एमवाई (मुस्लिम+यादव) समीकरण को तोड़ना है।-

माना जा रहा है कि खास टाइमिंग पर अनंत सिंह की रिहाई का मकसद लालू प्रसाद यादव के एमवाई (मुस्लिम+यादव) समीकरण को तोड़ना है।—अशोक महतो का ‘पिछड़ा कार्ड’वहीं दूसरी तरफ आरजेडी प्रत्याशी कुमारी अनिता के लिए उनके पति और खुद को कुर्मी समाज का बाहुबली कहने वाले अशोक महतो पूरे दमखम से मैदान में उतरे हैं।

भूमिहार समाज के “अन्याय

अशोक महतो ने जेल की जिंदगी को भूमिहार समाज के “अन्याय” से जोड़कर पिछड़ों की गोलबंदी का नया नैरेटिव खड़ा कर दिया है।—जेडीयू के लिए नई मुश्किलेंचुनावी माहौल धीरे-धीरे इस ओर बढ़ रहा है कि भले ही चुनाव में उम्मीदवार ललन सिंह बनाम कुमारी अनिता हों, लेकिन असली लिटमस टेस्ट नीतीश कुमार और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी का हो गया है।एनडीए अब तक सवर्ण, पासवान, कुर्मी, कुशवाहा और धानुक के समर्थन से मजबूत था, लेकिन अशोक महतो ने कुर्मी-धानुक को आरजेडी खेमे में खींचकर समीकरण बिगाड़ दिए हैं।—

नतीजों पर जातीय समीकरण हावी

मुंगेर की जंग अब पूरी तरह से जातीय ध्रुवीकरण में बदल चुकी है।जेडीयू का सहारा: सवर्ण + पासवान + एनडीए समर्थक पिछड़ेआरजेडी का सहारा: मुस्लिम + यादव + कुर्मी + धानुकअनंत सिंह और अशोक महतो की यह अप्रत्यक्ष भिड़ंत न सिर्फ मुंगेर बल्कि पूरे बिहार की राजनीति के लिए बड़ा संकेत है।

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