कांग्रेस के आक्रामक अभियान से राजद बैकफुट पर, राहुल गांधी की छाया में दबे तेजस्वी यादव

कांग्रेस के आक्रामक अभियान से राजद बैकफुट पर, राहुल गांधी की छाया में दबे तेजस्वी यादव

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान एक चौंकाने वाला राजनीतिक परिदृश्य सामने आया है। तीन दशकों में पहली बार ऐसा हुआ है जब कांग्रेस ने चुनावी माहौल में राजद पर बढ़त बना ली है। अपने आक्रामक प्रचार अभियान और संगठित रणनीति से कांग्रेस ने महागठबंधन के भीतर ही राजद को बैकफुट पर ला दिया है।

लालू प्रसाद यादव के दौर में कांग्रेस बिहार की राजनीति में राजद के इशारों पर चलती थी। सीट बंटवारे से लेकर रणनीतिक फैसलों तक, लालू की बात ही अंतिम होती थी। यहां तक कि वे सोनिया गांधी तक को चुनौती देने से नहीं हिचकते थे। लेकिन आज समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं।

तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राजद उस प्रभावशाली स्थिति में नहीं दिख रही जो कभी लालू यादव के समय थी। तेजस्वी के सामने अब कांग्रेस ही नहीं, बल्कि छोटे सहयोगी दल भी अपनी शर्तें रखने से नहीं हिचक रहे हैं। बिना विधायक और सांसद वाली वीआईपी पार्टी ने भी सीटों को लेकर राजद के सामने बड़ी मांग रख दी है, जबकि वामदलों ने भी हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग की है।

हालांकि राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभी भी लालू प्रसाद यादव ही हैं, लेकिन स्वास्थ्य और उम्र के कारण वे अब सक्रिय राजनीति से दूर हैं। पर्दे के पीछे से वे फैसले लेते जरूर हैं, पर चुनावी मंच पर तेजस्वी ही चेहरा बने हुए हैं।

लालू यादव ने संघर्ष और मेहनत से राजनीति में अपनी पहचान बनाई थी, जबकि तेजस्वी को यह मंच विरासत में मिला है। अनुभव की कमी और संगठनात्मक चुनौतियों के बीच तेजस्वी के सामने इस चुनाव में अपनी राजनीतिक पकड़ साबित करने की बड़ी परीक्षा है।

सार:
बिहार की राजनीति में पहली बार कांग्रेस ने राजद से बढ़त हासिल की है। महागठबंधन के भीतर कांग्रेस की रणनीति ने तेजस्वी यादव को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया है। अब देखना यह है कि क्या तेजस्वी लालू की विरासत को बचा पाएंगे या कांग्रेस इस बार बिहार में नई कहानी लिखेगी।

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