चुनाव आयोग की सख्त हिदायत: जाति, धर्म या भाषा के नाम पर वोट मांगना और सीमा से अधिक खर्च करना है ‘भ्रष्ट आचरण

चुनाव आयोग की सख्त हिदायत: जाति, धर्म या भाषा के नाम पर वोट मांगना और सीमा से अधिक खर्च करना है ‘भ्रष्ट आचरण

लोकतंत्र की पवित्र प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग ने एक बार फिर दोहराया है कि किसी भी उम्मीदवार या राजनीतिक दल द्वारा क्षेत्र, जाति, धर्म या भाषा के आधार पर वोट मांगना लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123(3) के तहत भ्रष्ट आचरण माना जाएगा।

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि कोई भी व्यक्ति या दल यह नहीं कह सकता कि किसी मतदाता को किसी विशेष उम्मीदवार को इसलिए वोट देना या न देना चाहिए क्योंकि वह किसी खास जाति, समुदाय या भाषा से संबंध रखता है। इस प्रकार की अपील न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के भी विपरीत है।

साथ ही आयोग ने निर्वाचन व्यय को लेकर भी सख्त निर्देश जारी किए हैं। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123(6) और निर्वाचन नियम, 1961 के नियम 90 के तहत प्रत्येक उम्मीदवार के लिए खर्च की अधिकतम सीमा तय की गई है। कोई भी उम्मीदवार इस सीमा से अधिक खर्च नहीं कर सकता। ऐसा करना भी भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आता है।

चुनाव आयोग के अनुसार, चुनाव खर्च की सीमा से अधिक व्यय करने पर उम्मीदवार की उम्मीदवारी रद्द की जा सकती है और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी संभव है।

निष्कर्ष:
चुनाव आयोग के ये प्रावधान लोकतंत्र की स्वच्छता और समानता को बनाए रखने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। जाति, धर्म या भाषा के नाम पर वोट मांगना और धनबल के जरिए चुनाव को प्रभावित करने का प्रयास दोनों ही लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ हैं। आयोग का संदेश साफ है—चुनाव निष्पक्ष होंगे, और कानून से ऊपर कोई नहीं।

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