आज से ठीक 86 साल पहले, दुनिया ने आसमान में तकनीकी क्रांति देखी थी। 27 अगस्त 1939 को जर्मनी के हाइकल एचई-178 (Heinkel He-178) ने पहली बार उड़ान भरकर इतिहास रच दिया। यह दुनिया का पहला जेट इंजन वाला विमान था, जिसे अर्नस्ट हेनरिक हाइकल ने डिजाइन किया था और कैप्टन एरिच वार्नित्ज ने सफलतापूर्वक उड़ाया।
हालांकि शुरुआत में इस विमान को ज्यादा महत्व नहीं दिया गया, लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मन सेना ने जेट तकनीक की अहमियत को समझा और इसके विकास को तेज़ी से आगे बढ़ाया।
क्या थी खासियत?
पहला विमान जो टर्बोजेट इंजन से उड़ा।लकड़ी और एल्यूमीनियम से निर्मित।एक सीटर छोटा विमान, जिसकी पंखुड़ियां ऊपर की ओर थीं।डिजाइन स्पीड: 360 मील प्रति घंटा, अधिकतम स्पीड: 435 मील प्रति घंटा।उड़ान अवधि: लगभग 10 मिनट।
कैप्टन वार्नित्ज ने उड़ान के बाद कहा
कैप्टन वार्नित्ज ने उड़ान के बाद कहा कि भले ही यह धीमा था, लेकिन ऊंचाई पर इसकी गति काफी प्रभावशाली रही। इसके बावजूद जर्मन एविएशन मिनिस्ट्री ने इसे अव्यवहारिक बताकर खारिज कर दिया और यह कभी किसी एयरफोर्स का हिस्सा नहीं बन पाया।
फिर भी, हाइकल एचई-178 ने अपनी ऐतिहासिक उड़ान से दुनिया को जेट युग में प्रवेश करवाया और हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया।
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