सीट बंटवारे पर NDA में घमासान: नीतीश कुमार नाराज़, चिराग को मिली 29 सीटों से जदयू असहज, BJP पर गहराया भरोसे का संकट
पटना: बिहार एनडीए में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है — और इस बार गड़बड़ी की शुरुआत सबसे ऊपर से हुई है। भाजपा के शीर्ष रणनीतिकार माने जाने वाले अमित शाह की अगुवाई में सीट शेयरिंग का जो फैसला लिया गया, उसने न सिर्फ जदयू को नाराज़ कर दिया है, बल्कि एनडीए की अंदरूनी एकता को भी गंभीर रूप से उजागर कर दिया है। सीट बंटवारे की प्रक्रिया से नीतीश कुमार इतने असहज हुए कि उन्होंने अब सीधा मोर्चा खोल दिया है।
‘चाणक्य’ अमित शाह की रणनीति बिहार में फेल
भाजपा के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार अमित शाह की सीट बंटवारे की स्कीम बिहार में उल्टी पड़ती दिख रही है। जदयू को दरकिनार कर चिराग पासवान को 29 सीटें देने का फैसला नीतीश कुमार को बेहद नागवार गुज़रा। पार्टी के सूत्रों का दावा है कि पटना में जब बातचीत चल रही थी, तब LJP (रामविलास) को 22 सीटों पर सहमति बनी थी, लेकिन जैसे ही वार्ता दिल्ली पहुंची, चिराग को 29 सीटें थमा दी गईं — और यही बनी एनडीए के भीतर दरार की सबसे बड़ी वजह।
धर्मेंद्र प्रधान और विनोद तावड़े भी नाकाम
नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले धर्मेंद्र प्रधान और भाजपा के संगठन महामंत्री विनोद तावड़े पिछले एक साल से गठबंधन में सामंजस्य बनाने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन सारी रणनीति और प्रयास अब नाकाम होते दिख रहे हैं।
पहली बार बिना साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस के NDA उम्मीदवार घोषित
एनडीए में पहली बार ऐसा हुआ कि बिना किसी साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस के उम्मीदवारों की घोषणा और सिम्बल वितरण हो रहा है। नीतीश कुमार ने सीएम आवास से ही प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न (सिंबल) देना शुरू कर दिया, जबकि भाजपा पहले ही अपनी सूची जारी कर चुकी थी।
जदयू का पलटवार: चिराग की 5 सीटों पर कब्जा
नीतीश कुमार ने चुप रहने की बजाय जवाबी हमला बोला है। जदयू ने चिराग पासवान की डिमांड वाली मोरवा, गायघाट, राजगीर, सोनबरसा और एकमा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं।
- राजगीर से मौजूदा विधायक कौशल किशोर को टिकट मिला।
- सोनबरसा से मंत्री रत्नेश सदा फिर मैदान में।
- एकमा से बाहुबली छवि वाले पूर्व विधायक धूमल सिंह को सिंबल मिला।
सिर्फ इतना ही नहीं, जीतन राम मांझी ने भी चिराग की मखदुमपुर सीट पर अपना प्रत्याशी उतारने की घोषणा कर दी है।
एनडीए में अब खुल्लमखुल्ला जंग
अब यह लड़ाई पर्दे के पीछे नहीं रही। एनडीए के भीतर सीधी टक्कर शुरू हो गई है। एक तरफ भाजपा ‘ऑल इज वेल’ का राग अलाप रही है, दूसरी तरफ उसके ही सहयोगी दल खुलेआम सीटों पर भिड़ रहे हैं।
नई शर्त: नीतीश को विधिवत CM फेस घोषित करो
सीट बंटवारे में हुए ‘धोखे’ के बाद जदयू ने अब अपने सहयोगियों के सामने नई और कड़ी शर्त रख दी है —
“अगर गठबंधन में रहना है, तो भाजपा समेत सभी घटक दल लिखित रूप से नीतीश कुमार को सीएम फेस घोषित करें।”
जदयू का कहना है कि अब सिर्फ मौखिक सहमति नहीं चलेगी, बल्कि कागज़ पर पक्की घोषणा होनी चाहिए कि बहुमत मिलने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही बनेंगे।
गठबंधन, मगर कौन किसके साथ?
जदयू का स्पष्ट कहना है —
“हमारा गठबंधन केवल भाजपा से है। चिराग, मांझी और कुशवाहा को भाजपा ने साथ जोड़ा है, तो उन्हें हैंडल करना भी भाजपा की ही जिम्मेदारी है।”
अब सवाल उठ रहा है — क्या भाजपा ने बिना जदयू को भरोसे में लिए सीट बंटवारे की मंजूरी दी? क्या अमित शाह से ऐसी चूक की उम्मीद थी?
निष्कर्ष: NDA के भविष्य पर संकट
एनडीए में जिस तरह से सहयोगी दल आपस में ही लड़ रहे हैं, उससे साफ है कि सीट बंटवारे का विवाद सिर्फ संख्या का नहीं, बल्कि विश्वास और नेतृत्व का भी है।
नीतीश कुमार की नाराज़गी अब खुलकर सामने आ गई है — और अगर भाजपा ने समय रहते समन्वय नहीं साधा, तो बिहार एनडीए की नींव हिल सकती है।
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