नीतीश कुमार की JDU ने जारी की पहली सूची: चिराग पासवान को सीधी चुनौती, 3 बाहुबली मैदान में, 18 विधायकों को दोबारा मौका
पटना: बिहार विधानसभा चुनाव की सियासी गहमागहमी के बीच नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) ने बुधवार को अपने 57 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी। इस सूची ने जहां चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं, वहीं पार्टी के भीतर कई पुराने चेहरों को दोबारा मौका देकर नीतीश कुमार ने ‘विश्वास और समीकरण’ दोनों साधने की कोशिश की है।
चिराग की डिमांडेड सीटों पर जेडीयू की सीधी चोट
JDU ने चिराग पासवान द्वारा मांगी गई सोनबरसा, अलौली, राजगीर, एकमा और मोरवा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार कर उन्हें सीधी चुनौती दी है। माना जा रहा है कि इससे LJP (रामविलास) की रणनीति को तगड़ा झटका लगा है।
तीन ‘बाहुबली’ नेताओं को मिला टिकट
सूची में तीन प्रभावशाली और विवादित छवि वाले नेताओं को भी मौका मिला है:
- मोकामा: अनंत सिंह
- एकमा: धुमल सिंह
- कुचायकोट: अमरेंद्र पांडे
ये तीनों अपने क्षेत्रों में मजबूत पकड़ रखते हैं और चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं। SC वर्ग को साधने की कोशिश
JDU ने 10 अनुसूचित जाति (SC) उम्मीदवारों को टिकट देकर सामाजिक समीकरणों को साधने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया है।
वरिष्ठ चेहरों पर भरोसा कायम
- सरायरंजन से एक बार फिर मौजूदा मंत्री विजय कुमार चौधरी को ही टिकट मिला है, जबकि उनके बेटे के नाम की चर्चा थी।
- हिलसा से 2020 में सिर्फ 12 वोटों से जीतने वाले कृष्ण मुरारी शरण उर्फ प्रेम मुखिया को भी दोबारा मौका मिला है।
- कल्याणपुर से मंत्री महेश्वर हजारी का टिकट कटने की अटकलें गलत साबित हुईं, उन्हें दोबारा मैदान में उतारा गया है।
18 विधायकों को फिर मौका, 2 के कटे टिकट
जेडीयू की सूची में 18 मौजूदा विधायकों को फिर से मौका दिया गया है, जबकि दो विधायकों के टिकट काटे गए हैं। पार्टी ने इस बार सिर्फ 101 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है, जबकि 2020 में उसने 115 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे।
‘विनिंग सीटों’ पर फोकस
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस बार सीटों की संख्या से ज्यादा ध्यान विनिंग पॉसिबिलिटी वाली सीटों पर दिया गया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव समेत कई मंत्रियों ने नामांकन दाखिल कर दिया है।
राजनीतिक संकेत साफ हैं: नीतीश कुमार एक तरफ चिराग पासवान को सीधी चुनौती दे रहे हैं, वहीं अपने पुराने भरोसेमंद नेताओं और सामाजिक संतुलन के साथ रणनीति को धार देने में जुटे हैं। बिहार की राजनीति में यह सूची बड़ा संदेश दे रही है — नीतीश अब भी पूरी तरह गेम में हैं
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