भारतीय वायुसेना अपने जंगी बेड़े को पूरी तरह आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ी छलांग लगाने जा रही है। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत वायुसेना ने 2031 तक स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस को बड़े पैमाने पर शामिल करने की योजना बनाई है। इसमें कुल 173 सिंगल-सीटर तेजस Mk1A फाइटर जेट और 47 ट्विन-सीटर ट्रेनर जेट होंगे। इस तरह अगले छह सालों में वायुसेना को 220 से अधिक अत्याधुनिक स्वदेशी जेट मिलने वाले हैं।
66,000 करोड़ की मेगा डील
अगस्त 2025 में रक्षा मंत्रालय ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) से 97 अतिरिक्त तेजस Mk-1A फाइटर्स खरीदने को मंजूरी दी थी। इस डील की कीमत लगभग 66,000 करोड़ रुपये है। इससे पहले 2021 में ही 83 तेजस Mk1A लड़ाकू विमानों का ऑर्डर HAL को दिया जा चुका था। यानी वायुसेना के पास अब तक कुल 180 से ज्यादा तेजस जेट के उत्पादन का रास्ता साफ हो चुका है।
कैसा होगा LCA तेजस Mk1A?
CNBCTV18 की रिपोर्ट के मुताबिक, तेजस Mk1A चौथी और आधी (4.5 Gen) पीढ़ी का हल्का, बहुउद्देश्यीय और सभी मौसम में काम करने वाला विमान है। HAL के अनुसार, यह आधुनिक तकनीक और डिजाइन का एक मिश्रण है।
फ्लाई-बाय-वायर सिस्टम: क्वाड्राप्लेक्स फ्लाई-बाय-वायर नियंत्रण जिससे विमान बेहद फुर्तीला और स्थिर होगा।
ग्लास कॉकपिट: उन्नत डिजिटल एवियोनिक्स और पूरी तरह ग्लास कॉकपिट से लैस।
एयरफ्रेम: हल्के वजन और मजबूती के लिए कंपोजिट मटेरियल का उपयोग।
रडार: इनमें इजरायली ELM-2052 AESA रडार या स्वदेशी ‘उत्तम’ AESA रडार लगाया जाएगा।
इन खूबियों के कारण तेजस Mk1A न केवल दुश्मन विमानों से मुकाबले में सक्षम होगा बल्कि हवा से जमीन पर हमलों में भी बेहतरीन प्रदर्शन कर सकेगा।
18 ट्विन-सीटर जेट्स की सप्लाई
2023 में भारतीय वायुसेना ने HAL को 18 ट्विन-सीटर तेजस का ऑर्डर दिया था। HAL ने आश्वासन दिया है कि 2026-27 तक इन सभी विमानों की डिलीवरी पूरी हो जाएगी। ट्रेनर जेट्स का इस्तेमाल नए पायलटों के प्रशिक्षण के साथ-साथ ऑपरेशनल जरूरतों में भी किया जाएगा।
वायुसेना की संरचना में बदलाव
वायुसेना की योजना है कि 2031 तक तेजस जेट्स को शामिल कर लगभग 11 स्क्वॉड्रन तैयार किए जाएं। हर स्क्वॉड्रन में औसतन 20 फाइटर जेट होंगे, जिनमें 4 ट्विन-सीटर ट्रेनर भी शामिल होंगे। इससे भारतीय वायुसेना की ताकत और लचीलापन दोनों बढ़ेंगे।
इन विमानों में भविष्य की युद्ध रणनीतियों के तहत मैन-अनमैन टीमिंग (MUMT) ऑपरेशंस की क्षमता भी होगी। इसका मतलब है कि तेजस लड़ाकू विमान मानवरहित ड्रोन के साथ टीम बनाकर मिशन पूरा कर सकेंगे। यह क्षमता आने वाले दशक में वायुसेना की रणनीतिक बढ़त साबित हो सकती है।
आत्मनिर्भर भारत की ओर बड़ा कदम
तेजस परियोजना पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित है। इसका उत्पादन देश में ही हो रहा है और लगातार इसमें सुधार किए जा रहे हैं। तेजस का Mk1A संस्करण, पहले से ज्यादा घातक और तकनीकी रूप से उन्नत है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह विमान न केवल चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों की वायुसेना के आधुनिक फाइटर्स का मुकाबला कर सकेगा, बल्कि भारत की रक्षा क्षमता को भी आत्मनिर्भर बनाएगा।
निष्कर्ष
2031 तक भारतीय वायुसेना के पास तेजस जेट्स का मजबूत बेड़ा होगा, जो 11 स्क्वॉड्रन में तैनात होगा। यह सिर्फ सैन्य शक्ति का विस्तार नहीं, बल्कि भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता और आत्मनिर्भरता का प्रमाण होगा। आने वाले वर्षों में तेजस भारतीय आसमान में ‘स्वदेशी शक्ति’ का प्रतीक बनकर उड़ान भरेगा।
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