काठमांडू। नेपाल की राजधानी काठमांडू में मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास के बाहर हालात हिंसक हो गए। सरकार विरोधी रैली के दौरान गुस्साई भीड़ ने सुरक्षा घेरा तोड़ दिया और आगजनी व तोड़फोड़ की। स्थिति तब और बिगड़ गई जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों से बंदूकें भी छीन लीं।
कैसे भड़की हिंसा
सूत्रों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों का गुस्सा सरकार की आर्थिक नीतियों, बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी को लेकर था। रैली के दौरान अचानक भीड़ उग्र हो गई और पीएम आवास की ओर बढ़ने लगी। इस दौरान पथराव, तोड़फोड़ और आगजनी हुई।
पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागकर स्थिति संभालने की कोशिश की। लेकिन प्रदर्शनकारियों की एक टुकड़ी पुलिस पर टूट पड़ी और कुछ हथियार छीन लिए। इससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया।
सुरक्षा पर सवाल
बताया जा रहा है कि स्थानीय पुलिस ने पीएम आवास की सुरक्षा बढ़ाने से पहले ही इनकार कर दिया था। यही वजह रही कि प्रदर्शनकारियों को रोकने में सुरक्षा बलों को भारी मुश्किल हुई। अब सवाल उठ रहे हैं कि प्रधानमंत्री आवास जैसे संवेदनशील स्थल की सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई।
विपक्ष का हमला
घटना के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधा। उनका कहना है कि सरकार जनता की समस्याओं को नज़रअंदाज़ कर रही है और सुरक्षा इंतजामों में भी गंभीर लापरवाही बरत रही है। नेपाली कांग्रेस समेत कई दलों ने संसद में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने का ऐलान किया है।
जनता का गुस्सा क्यों भड़का?
- आर्थिक संकट: नेपाल महंगाई, बेरोजगारी और बढ़ते विदेशी कर्ज से जूझ रहा है। आम जनता को रोज़मर्रा की ज़रूरतें पूरी करने में कठिनाई हो रही है।
- राजनीतिक अस्थिरता: सरकारें बार-बार बदल रही हैं और सत्ता संघर्ष जारी है। इससे प्रशासनिक कामकाज और विकास प्रभावित हो रहा है।
- भ्रष्टाचार के आरोप: सरकार पर लगातार भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के आरोप लग रहे हैं। जनता को लग रहा है कि नेताओं की प्राथमिकता जनता नहीं, बल्कि अपनी सत्ता बचाना है।
- विपक्ष का दबाव: विपक्ष इन मुद्दों को लगातार हवा दे रहा है और जनता को सड़कों पर उतरने के लिए प्रेरित कर रहा है।
आगे की कार्रवाई
फिलहाल राजधानी में भारी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है और छीने गए हथियारों की बरामदगी के लिए अभियान चलाया जा रहा है। सरकार ने घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए ह
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