“स्कूल बैग रह गया पीछे, बच्चा हुआ गायब – पुलिस ने 6 घंटे में सुलझाई गुत्थी”

“स्कूल बैग रह गया पीछे, बच्चा हुआ गायब – पुलिस ने 6 घंटे में सुलझाई गुत्थी”

पटना/बेतिया, 16 सितंबर 2025।
बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया में सोमवार को हुई एक सनसनीखेज़ घटना ने पूरे इलाके को दहला दिया। महज़ पांच साल के मासूम छात्र आर्यन का स्कूल से अपहरण कर लिया गया था। हालांकि, पुलिस की त्वरित कार्रवाई और सतर्कता ने इसे बड़ी वारदात में बदलने से रोक दिया। घटना के छह घंटे के भीतर ही बच्चे को गोरखपुर रेलवे स्टेशन से सुरक्षित बरामद कर लिया गया, और अपहरणकर्ता को भी गिरफ्तार कर लिया गया।

यह घटना जितनी चौंकाने वाली थी, उतनी ही राहत देने वाली भी रही क्योंकि अपहरण की खबर मिलते ही पुलिस ने जिस तेजी और दक्षता से काम किया, वह कानून-व्यवस्था पर जनता का भरोसा बढ़ाने वाला है।

घटना कैसे हुई?

यह मामला बेतिया के लौरिया थाना क्षेत्र का है। सोमवार की सुबह एक निजी स्कूल में पांच वर्षीय आर्यन पढ़ने के लिए गया था। तभी अपहरणकर्ता ने स्कूल के एक शिक्षक को फोन कर बताया कि बच्चे के पिता उसे बुला रहे हैं। शिक्षक ने जवाब दिया कि पिता को खुद आकर बच्चे को ले जाना होगा।

इसी दौरान आरोपी मौका देखकर स्कूल के बाहर से बच्चे को उठा ले गया।

दोपहर तक जब आर्यन घर नहीं पहुंचा, तो परिवार वालों की चिंता बढ़ गई। परिजनों ने पहले स्कूल में जाकर पूछताछ की। वहां उन्हें पता चला कि बच्चा सुबह 9 बजे से ही गायब था, जबकि उसका स्कूल बैग कक्षा में ही पड़ा था।

परिजनों के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। पिता अनूप श्रीवास्तव ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।

पुलिस की तेज़ कार्रवाई

बच्चे के गुम होने की सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय हो गई। एसपी डॉ. शौर्य सुमन के निर्देशन में एसडीपीओ विवेक दीप के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम गठित की गई।

इस सूचना पर बेतिया पुलिस ने तुरंत गोरखपुर जीआरपी और वहां के एसएसपी से संपर्क किया। गोरखपुर पुलिस ने अलर्ट जारी कर रेलवे स्टेशन पर निगरानी तेज कर दी।

गोरखपुर स्टेशन से बरामदगी

करीब पांच से छह घंटे की संयुक्त कार्रवाई के बाद गोरखपुर रेलवे स्टेशन से बच्चे को सकुशल बरामद कर लिया गया। मौके से अपहरणकर्ता भी पुलिस के हत्थे चढ़ गया।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी ने बच्चे की पहचान छिपाने के लिए उसके कपड़े तक बदल दिए थे, ताकि किसी को शक न हो। लेकिन पुलिस की सूझबूझ और ट्रैकिंग ने आरोपी की चालाकी पर पानी फेर दिया।

पुलिस का आधिकारिक बयान

एसपी डॉ. शौर्य सुमन ने मीडिया को बताया कि यह घटना पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण थी क्योंकि अपहरणकर्ता काफी चालाकी से काम कर रहा था। लेकिन तकनीकी सहयोग और त्वरित एक्शन की वजह से बच्चे को सुरक्षित वापस लाने में सफलता मिली।

उन्होंने कहा:
“फोन की लोकेशन और ट्रैकिंग के जरिए हमारी टीम अपहरणकर्ता तक पहुंची। गोरखपुर पुलिस की मदद से बच्चे को सुरक्षित निकाल लिया गया। आरोपी से पूछताछ की जा रही है कि इस घटना में और कितने लोग शामिल थे।”

इलाके में दहशत और राहत

बेतिया और आसपास के इलाके में इस घटना की खबर फैलते ही दहशत का माहौल हो गया था। माता-पिता में सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता देखी गई।

लेकिन बच्चे की सुरक्षित वापसी की खबर मिलते ही लोगों ने राहत की सांस ली। स्थानीय लोगों ने पुलिस की तत्परता की सराहना की और कहा कि अगर पुलिस ने तुरंत कदम न उठाया होता, तो नतीजे भयावह हो सकते थे।

अपहरण का पैटर्न और आशंका

जांच में सामने आया है कि अपहरणकर्ता ने वारदात को अंजाम देने के लिए पहले से योजना बनाई थी। बच्चे को स्कूल से सीधे उठाना आसान नहीं था, इसलिए उसने फोन के जरिए शिक्षक को झांसा देने की कोशिश की।

हालांकि, शिक्षक ने नियम का पालन करते हुए पिता को खुद बुलाने को कहा। लेकिन बाहर मौका देखकर बच्चा ले जाया गया।

पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या आरोपी का मकसद फिरौती मांगना था या इसके पीछे किसी और तरह की साजिश थी।

सामाजिक और मनोवैज्ञानिक असर

ऐसी घटनाएँ छोटे बच्चों के माता-पिता में असुरक्षा की भावना पैदा करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अभिभावकों और स्कूलों को बच्चों की सुरक्षा को लेकर अधिक सतर्क रहने की ज़रूरत है।

स्कूल प्रशासन को भी चाहिए कि बिना लिखित अनुमति के बच्चे को किसी के साथ न भेजें, चाहे वह व्यक्ति कितना भी परिचित क्यों न लगे।

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