सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: दो साल में सभी शिक्षकों को पास करना होगा TET, अल्पसंख्यक स्कूलों पर भी उठे सवाल

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: दो साल में सभी शिक्षकों को पास करना होगा TET, अल्पसंख्यक स्कूलों पर भी उठे सवाल

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक ऐतिहासिक आदेश जारी किया है। अब देशभर के सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों के सभी शिक्षकों के लिए टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) पास करना अनिवार्य होगा। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह नियम उन शिक्षकों पर भी लागू होगा जो 2011 से पहले नियुक्त हुए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हर शिक्षक को अपने पद पर बने रहने के लिए अगले दो सालों में TET क्वालिफाई करना होगा। हालांकि, जिन शिक्षकों की सेवा सेवानिवृत्ति तक पाँच साल से कम शेष है, उन्हें इस अनिवार्यता से अस्थायी राहत दी गई है।

अल्पसंख्यक स्कूलों पर नई बहस

संविधान के अनुच्छेद 30 के तहत अल्पसंख्यक संस्थानों को स्वायत्तता मिली हुई है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि यह स्वायत्तता गुणवत्ता और मानक परीक्षण से छूट का आधार नहीं हो सकती। अदालत ने इस जटिल मुद्दे को विस्तृत संविधान पीठ के पास भेजा है। आने वाले समय में यह तय होगा कि अल्पसंख्यक स्कूलों पर भी TET और आरटीई (Right to Education Act) की शर्तें लागू होंगी या नहीं।

राज्यों में मचा हड़कंप

कई राज्यों में हजारों शिक्षक इस आदेश से प्रभावित होंगे। उदाहरण के तौर पर कर्नाटक में लगभग एक लाख शिक्षकों को अब TET पास करना होगा। महाराष्ट्र, बिहार, उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में भी शिक्षक संगठन विरोध जता रहे हैं। उनका कहना है कि पुराने नियमों के तहत नियुक्त शिक्षकों पर नई शर्तें थोपना अनुचित है।

शिक्षा मानकों को मजबूत करने की पहल

सुप्रीम कोर्ट ने प्रमाटी फैसले (2014) पर भी सवाल उठाए हैं, जिसमें अल्पसंख्यक स्कूलों को आरटीई अधिनियम की कई धाराओं से छूट दी गई थी। अदालत का मानना है कि अगर आरटीई पूरी तरह लागू हो तो शिक्षा की गुणवत्ता, प्रशिक्षित शिक्षक और आवश्यक संसाधन सुनिश्चित किए जा सकते हैं।

निष्कर्ष

यह फैसला शिक्षकों के लिए तगड़ा झटका जरूर है, लेकिन दीर्घकाल में बच्चों के हित में माना जा रहा है। अब शिक्षक-समुदाय के सामने चुनौती है कि वे तय समय सीमा में TET की तैयारी करें। वहीं, अल्पसंख्यक संस्थानों पर अंतिम फैसला आने तक स्थिति असमंजस में बनी रहेगी।

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