करवा चौथ की परंपरा के पीछे छिपी अमर प्रेम कथा

करवा चौथ की परंपरा के पीछे छिपी अमर प्रेम कथा

नई दिल्ली, 10 अक्तूबर:
देशभर में आज करवा चौथ का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। सुहागिन महिलाएँ अपने पतियों की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करते हुए निर्जला व्रत रख रही हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस पर्व के पीछे एक मार्मिक कथा जुड़ी हुई है?

लोककथाओं के अनुसार, बहुत समय पहले एक राजा की सात बेटियाँ थीं। करवा चौथ के दिन सभी बहनों ने अपने-अपने पतियों की दीर्घायु के लिए व्रत रखा। सबसे छोटी बहन को शाम होते-होते तेज भूख-प्यास सताने लगी। भाइयों को उसकी हालत देखी नहीं गई, इसलिए उन्होंने एक शरारत की।

उन्होंने पीपल के पेड़ के पीछे दीपक जलाकर छलनी से दिखाया, ताकि ऐसा लगे कि चाँद निकल आया है। छोटी बहन ने भाइयों की बात पर भरोसा कर लिया और बिना असली चाँद देखे व्रत तोड़ दिया। कहते हैं कि उसी रात उसके पति की तबीयत अचानक बिगड़ गई और वे अचेत हो गए।

दुखी होकर जब वह मार्ग में रोती हुई जा रही थी, तभी देवी पार्वती प्रकट हुईं। उन्होंने कहा,

“तुमसे भूल हो गई है, तुमने अधूरा व्रत तोड़ा है। अब सच्चे मन से पूरा व्रत करो, सब ठीक हो जाएगा।”

अगले वर्ष उस स्त्री ने पूरे विधि-विधान से करवा चौथ का व्रत किया, और उसके पति को नया जीवन मिला। तब से यह पर्व सच्चे प्रेम, समर्पण और विश्वास का प्रतीक बन गया।

आज भी देश के विभिन्न हिस्सों में महिलाएँ सोलह श्रृंगार कर, चाँद के दर्शन के बाद ही व्रत तोड़ती हैं। करवा चौथ का यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था, बल्कि पति-पत्नी के अटूट बंधन और नारी की शक्ति का प्रतीक माना जाता है।

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