असुरों के राजा महाबली (बलि) एक महान दानी और पराक्रमी शासक थे। वे विष्णु भक्त भी थे लेकिन उनकी शक्ति और प्रसिद्धि इतनी बढ़ गई थी कि इंद्रलोक तक पर उन्होंने अधिकार कर लिया था। देवता भयभीत हो गए और भगवान विष्णु से सहायता की प्रार्थना की।
विष्णु का अवतरण – वामन रूप में
भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया — एक छोटे ब्राह्मण बालक के रूप में। उनका शरीर छोटा था, पर तेज अपार। वे यज्ञ के दौरान बलि के पास पहुंचे और दान में तीन पग भूमि माँगी।
बलि ने हँसते हुए कहा – “इतना कम? तुम तो बालक हो, माँगो जितना चाहो।”
पर वामन बोले – “मुझे बस तीन पग भूमि चाहिए, उतनी ही मेरी आवश्यकता है।”
तीनों पग में नाप लिया सारा ब्रह्मांड
बलि ने प्रतिज्ञा कर ली। तभी वामन ने अपना विराट रूप धारण कर लिया:
- पहले पग में उन्होंने पृथ्वी को नापा,
- दूसरे पग में आकाश और स्वर्गलोक को,
- तीसरे पग के लिए स्थान नहीं बचा — तब बलि ने अपना सिर आगे कर दिया।
भगवान विष्णु ने तीसरा पग उसके सिर पर रख दिया और उसे पाताल लोक का राजा बना दिया, लेकिन उसके भक्ति भाव से प्रसन्न होकर उसे अमरत्व और पुनः स्वर्ग में स्थान पाने का वरदान भी दिया।
कथा की शिक्षा:
- अहंकार कितना भी बड़ा हो, भगवान की लीला के सामने तुच्छ है।
- सच्चा दान और भक्ति बिना किसी दिखावे के होती है।
- भगवान अपने भक्त की परीक्षा लेते हैं, पर भक्ति को कभी व्यर्थ नहीं जाने देते।
विष्णु के वामन अवतार की महिमा:
यह अवतार दशावतारों में पाँचवां है और विशेष रूप से ओणम (Onam) पर्व में केरल में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है, जहाँ बलि राजा की धरती पर वापसी का स्वागत किया जाता है।
Views: 217
