नई दिल्ली: उपराष्ट्रपति पद के चुनाव को लेकर राजधानी दिल्ली में सियासी हलचल तेज हो गई है। 21 अगस्त 2025 को नामांकन की अंतिम तिथि नजदीक आने के साथ ही बीजेपी और एनडीए में संभावित उम्मीदवारों के नाम को लेकर चर्चाओं का दौर चरम पर है।
एनडीए का पलड़ा भारी
लोकसभा और राज्यसभा के सांसद इस चुनाव में वोट डालेंगे। मौजूदा समीकरणों में एनडीए का पलड़ा स्पष्ट रूप से भारी है—राज्यसभा में पूर्ण बहुमत, लोकसभा में मजबूत स्थिति और मनोनीत सदस्यों का समर्थन बीजेपी के पक्ष में है।
उम्मीदवार चयन की कमान पीएम मोदी के हाथ
बीजेपी के सहयोगी दलों ने उपराष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार चुनने की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा को सौंप दी है। पार्टी के भीतर यह भी साफ कर दिया गया है कि पीएम मोदी का फैसला ही अंतिम होगा।
विपक्ष की रणनीति
उधर, विपक्षी INDIA ब्लॉक ने भी एक संयुक्त उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सहयोगी दलों से संपर्क साध रहे हैं, ताकि विपक्ष की एकजुटता का संदेश दिया जा सके, भले ही संख्या बल उनके पक्ष में न हो।
चुनाव की प्रमुख तिथियां
- नामांकन की अंतिम तिथि: 21 अगस्त 2025
- जांच: 22 अगस्त 2025
- नाम वापसी की अंतिम तिथि: 25 अगस्त 2025
- मतदान व मतगणना: 9 सितंबर 2025
विश्लेषण
राजनीतिक समीकरण साफ संकेत देते हैं कि एनडीए का उम्मीदवार अगले उपराष्ट्रपति बनने की दौड़ में सबसे आगे है। हालांकि, विपक्ष इस चुनाव को प्रतीकात्मक लड़ाई के तौर पर देख रहा है, जिससे 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी में एकजुटता का संदेश दिया जा सके।
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