पटना: बिहार की राजनीति में सोमवार की शाम एक बड़ा मोड़ लेकर आई, जब राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गुस्सा एक बार फिर चर्चा में आ गया। बिल्कुल अल्बर्ट पिंटो की तर्ज पर उन्होंने जो गुस्सा दिखाया, वह महज़ भावनाओं की उबाल नहीं बल्कि NDA के भीतर जारी खींचतान का बड़ा संकेत था। टिकट बंटवारे को लेकर नीतीश ने अपनी नाराजगी खुलकर दिखा दी — और इस गुस्से की गूंज अब दिल्ली तक सुनाई दे रही है।
गुस्से की वजहें क्या रहीं?
नीतीश कुमार का गुस्सा ऐसे ही नहीं फूटा। इसके पीछे पांच ठोस राजनीतिक वजहें थीं, जो NDA के भीतर असंतुलन और अविश्वास की ओर इशारा करती हैं:
- 142 बनाम 101 की जंग
टिकट बंटवारे में JDU को जहां 101 सीटें दी गईं, वहीं बीजेपी समेत अन्य दलों को कुल मिलाकर 142 सीटें मिल गईं। यह बंटवारा नीतीश कुमार को असंतुलन की ओर ले जाता दिखा — उन्हें यह संदेश साफ मिला कि अब वे गठबंधन में ‘बड़े भाई’ नहीं रहे। - 103 सीटें कैसे हुईं 101?
JDU के अंदर ही कौन लोग हैं जिन्होंने 103 सीटों की मांग को 101 तक सीमित करवा दिया? यह सवाल नीतीश को अंदर तक खल गया। - घरेलू घात?
पार्टी के भीतर कौन हैं वे लोग जो बीजेपी के साथ मिलीभगत कर नीतीश की मर्जी के खिलाफ फैसले करवा रहे हैं? इस पर भी सीएम खासे खफा हैं। - NDA में सुपर सीएम कौन?
बार-बार सवाल उठता रहा है कि असली ताकत बीजेपी के पास है या नीतीश के पास? अब जब बिना पूछे JDU की कुछ सीटें काट दी गईं, तो नीतीश को यह सीधा संदेश गया कि कोई और ‘सुपर CM’ की भूमिका में आ चुका है। - सीटिंग सीटें गईं कैसे?
सबसे बड़ा झटका यह था कि नीतीश कुमार की जानकारी के बगैर ही सोनबरसा, राजगीर, हिलसा, मोरवा जैसी सीटें साथी दलों को दे दी गईं। यह सीधे-सीधे नीतीश की राजनीतिक ताकत को चुनौती देने जैसा था।
नीतीश का एक्शन: इनको बुलाया, सिंबल दिया
गठबंधन में तालमेल की प्रतीक्षा किए बिना ही नीतीश कुमार ने JDU के उम्मीदवारों को टिकट बांटना शुरू कर दिया। ये सीधे तौर पर संदेश था कि अगर गठबंधन में सम्मान नहीं मिलेगा, तो वे अकेले ही फैसले ले सकते हैं।
- सोनबरसा से रत्नेश सदा,
- राजपुर से संतोष निराला,
- झाझा से दामोदर रावत,
- जमालपुर से शैलेश कुमार,
- वैशाली से सिद्धार्थ पटेल — इन सभी को नीतीश ने खुद बुलाकर सिंबल थमा दिया।
अंदरखाने क्या चल रहा है?
नीतीश के इस एक्शन के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि कहीं फिर से ‘चाचा-भतीजा’ की नजदीकियां तो नहीं बढ़ रहीं। खबरें आ रही हैं कि तेजस्वी यादव से संपर्क साधने के लिए किसी वरिष्ठ JDU नेता को जिम्मेदारी दी गई है। वहीं बीजेपी के बड़े नेता, जिनमें गृह मंत्री अमित शाह का नाम भी शामिल है, जल्द पटना पहुंच सकते हैं इस सियासी आग को बुझाने।
JDU कह रही है — “All is well!”
इस बीच JDU के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने ट्वीट कर माहौल को शांत करने की कोशिश की और लिखा — “All is well”, लेकिन सियासी जानकार मानते हैं कि “ऑल इज़ वेल” कहना और वाकई सब कुछ ठीक होना — इन दोनों में फर्क है।
निष्कर्ष:
नीतीश कुमार का यह गुस्सा महज़ एक भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि सत्ता साझेदारी में हो रही खामियों की ओर तीखा इशारा है। उन्होंने यह साफ कर दिया है कि अगर NDA में उन्हें उचित सम्मान नहीं मिला, तो वह अगली चाल खेलने में देर नहीं लगाएंगे।
अब सवाल ये है — NDA में नीतीश इन हैं या आउट?
या फिर बिहार की राजनीति में एक बार फिर गठबंधन की तस्वीर बदलने वाली है?
नीतीश कुमार को क्यों आया अल्बर्ट पिंटो जैसा गुस्सा? NDA में सियासी ज़लज़ला, टिकट बंटवारे से मचा घमासान!
बदलाव के इस मौसम में सबकी नजरें नीतीश पर टिकी हैं…
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