झारखंड में पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं पर बवाल जारी, सरकार झुकेगी या छात्र बढ़ाएंगे आंदोलन?

झारखंड में पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं पर बवाल जारी, सरकार झुकेगी या छात्र बढ़ाएंगे आंदोलन?

विधानसभा घेराव के बाद तनाव बढ़ा

रांची, 11 अगस्त 2026: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी, पेपर लीक के आरोप और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर छात्रों और सरकारी नौकरी के अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। रांची में कई दिनों से चल रहे आंदोलन ने सोमवार को उस समय बड़ा रूप ले लिया, जब प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने झारखंड विधानसभा का घेराव करने की कोशिश की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग, वाटर कैनन, आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया।

14वीं JPSC परीक्षा के रिजल्ट के बाद शुरू हुआ विवाद

मौजूदा आंदोलन की तत्काल वजह 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम को लेकर उठे सवाल हैं। इसका रिजल्ट 5 जुलाई 2026 को जारी किया गया था। अभ्यर्थियों ने परीक्षा और चयन प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए परीक्षा रद्द करने तथा पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है।

छात्रों का कहना है कि मामला केवल एक परीक्षा के रिजल्ट तक सीमित नहीं है। उनका आरोप है कि झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से पारदर्शिता, परीक्षा संचालन, रिजल्ट, भर्ती प्रक्रिया और कथित पेपर लीक जैसे सवाल उठते रहे हैं। इसी वजह से आंदोलन अब व्यापक भर्ती सुधार की मांग में बदल गया है।

25 जुलाई से लगातार आंदोलन

रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से 25 जुलाई को ‘JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच’ के बैनर तले आंदोलन की शुरुआत हुई थी। 7 अगस्त तक आंदोलन 14वें दिन में पहुंच गया था और प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन खत्म करने से इनकार कर दिया था। कई अभ्यर्थियों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल भी शुरू की। रिपोर्टों के मुताबिक छह प्रदर्शनकारी भूख हड़ताल पर थे और एक प्रदर्शनकारी की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे एंबुलेंस से अस्पताल ले जाना पड़ा।

सरकार से बातचीत हुई, लेकिन नहीं बनी बात

बढ़ते आंदोलन के बीच झारखंड सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्र संगठनों के साथ बातचीत की कोशिश की। मंत्रियों की पांच सदस्यीय समिति ने अलग-अलग छात्र संगठनों और प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की। सरकार की ओर से कहा गया कि छात्रों की मांगों पर विचार किया जाएगा और उनकी बात मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सामने रखी जाएगी।

इसके बावजूद छात्रों ने आंदोलन वापस लेने से इनकार कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि केवल आश्वासन से आंदोलन खत्म नहीं होगा। जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रहेगा।

छात्रों की प्रमुख मांगें क्या हैं?

आंदोलनकारी अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में 14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करना, कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराना और भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना शामिल है।

कुछ प्रदर्शनकारी संगठनों ने पूरे मामले की CBI जांच या झारखंड से बाहर के सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जजों की समिति से जांच कराने की मांग की है। वहीं, कुछ छात्र संगठनों ने JPSC और JSSC की परीक्षाओं की 90 दिनों के भीतर CBI/CID जांच तथा परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग रखी है।

JPSC के तीन सदस्यों ने दिया इस्तीफा

आंदोलन के बीच 9 अगस्त को JPSC के तीन सदस्यों—अजीता भट्टाचार्य, अनिमा हांसदा और जमाल अहमद—के इस्तीफे राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने स्वीकार कर लिए। यह घटनाक्रम उस समय सामने आया, जब भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का दबाव लगातार बढ़ रहा था।

इसके अलावा JPSC ने जुलाई में कई भर्ती परीक्षाओं को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया था। इनमें सिविल सेवा मुख्य परीक्षा समेत कुल नौ परीक्षाएं शामिल थीं। परीक्षा स्थगित होने का फैसला भी उस समय आया जब आयोग की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच चल रही थी।

सोमवार को विधानसभा घेराव ने बढ़ाया तनाव

9 अगस्त तक सरकार और छात्रों के बीच बातचीत के कई दौर के बावजूद गतिरोध खत्म नहीं हुआ। इसके बाद अभ्यर्थियों ने 10 अगस्त को विधानसभा घेराव का ऐलान किया। सोमवार को बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी विधानसभा की ओर बढ़े और कई बैरिकेड तोड़ते हुए आगे बढ़ने की कोशिश की। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया तथा लाठीचार्ज भी किया गया।

प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई और विधानसभा की कार्यवाही भी प्रभावित हुई। प्रदर्शनकारियों की ओर से परीक्षा रद्द करने और स्वतंत्र जांच की मांग दोहराई गई।

सरकार के सामने अब बड़ी चुनौती

एक तरफ सरकार बातचीत के जरिए मामले को सुलझाने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ छात्र संगठन अपनी मांगों पर ठोस फैसला होने तक आंदोलन जारी रखने पर अड़े हैं। आंदोलन के लंबा खिंचने और विधानसभा घेराव के बाद अब सरकार पर राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव भी बढ़ गया है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार छात्रों की प्रमुख मांगों पर ठोस फैसला लेकर आंदोलन खत्म कराएगी, या आने वाले दिनों में आंदोलन और बड़ा रूप लेगा?

फिलहाल छात्रों का संदेश साफ है—सिर्फ आश्वासन नहीं, भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और कथित गड़बड़ियों पर ठोस कार्रवाई चाहिए। वहीं सरकार के सामने चुनौती है कि वह छात्रों की चिंताओं का समाधान बातचीत और जांच के जरिए करे, ताकि आंदोलन और न बढ़े।

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