झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन ने अपने ससुर के निधन के बाद शोक अवधि में धेंकी से चावल कूटकर पारंपरिक आदिवासी संस्कृति को सम्मान दिया। कल्पना सोरेन का यह कदम न केवल आदिवासी रीति-रिवाजों के प्रति उनकी आस्था को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि झारखंड की सांस्कृतिक जड़ें आज भी गांव-घर की रसोई तक जीवंत हैं।

ससुर के अंतिम संस्कार
ससुर के अंतिम संस्कार और शोक काल में कल्पना सोरेन ने परंपरा के अनुसार घर के काम-काज संभालते हुए चूल्हा-चौका अन्य पारंपरिक कार्य किए।
परिवार के करीबी सूत्रों के अनुसार, कल्पना सोरेन का यह कदम न सिर्फ आदिवासी समाज के रीति-रिवाजों के प्रति सम्मान को दर्शाता है, बल्कि आधुनिक पेशे और पारंपरिक जीवनशैली के बीच संतुलन का उदाहरण भी है।
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