प्रशांत किशोर की एंट्री से लालू-नीतीश की बढ़ी टेंशन, जन सुराज का 10% वोट शेयर बना गेमचेंजर

प्रशांत किशोर की एंट्री से लालू-नीतीश की बढ़ी टेंशन, जन सुराज का 10% वोट शेयर बना गेमचेंजर

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का माहौल गरमाने लगा है। इस बार मैदान में एक नया खिलाड़ी उतर चुका है, जिसने बड़े-बड़े राजनीतिक दलों की नींद उड़ा दी है। चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर (PK) अपनी पार्टी जन सुराज के साथ सभी 243 सीटों पर उम्मीदवार उतारने जा रहे हैं।

फिलहाल उनकी पार्टी को पारंपरिक राजनीति में बड़े खिलाड़ी गंभीरता से नहीं ले रहे, लेकिन पिछले उपचुनावों में जन सुराज को मिले 10% वोट शेयर ने राजनीतिक गणित को बदलकर रख दिया है। राजनीति के जानकार मानते हैं कि यह वोट शेयर जीत की गारंटी न सही, लेकिन कई सीटों पर हार-जीत का अंतर तय कर सकता है—कुछ वैसा ही जैसा 2020 में चिराग पासवान ने किया था।


लालू यादव के लिए चुनौती

जन सुराज ने ऐलान किया है कि वह 40 मुस्लिम उम्मीदवार उतारेगी। राजद (RJD) का परंपरागत मुस्लिम-यादव (MY) समीकरण अब दोतरफा चुनौती झेल रहा है। एक तरफ AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी अलग मोर्चा संभाले हुए हैं, दूसरी ओर PK मुस्लिम वोटरों को यह समझाने की कोशिश में हैं कि आबादी के अनुपात में उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी बहुत कम है।

PK का तर्क है—
“बिहार में मुस्लिम आबादी के हिसाब से 40 मुस्लिम विधायक होने चाहिए, लेकिन अभी सिर्फ 19 हैं और राजद के टिकट पर तो केवल 8। जिन पर आप भरोसा कर रहे हैं, वही आपका हक छीन रहे हैं।”

अगर मुस्लिम वोटों का छोटा सा हिस्सा भी PK की ओर शिफ्ट होता है, तो राजद के लिए बड़ा झटका हो सकता है।


नीतीश कुमार की मुश्किलें

प्रशांत किशोर ने 40 महिलाओं और 70 अतिपिछड़ों को टिकट देने का ऐलान किया है। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी घोषणा की है कि जिन उम्मीदवारों के पास संसाधन नहीं होंगे, उनका चुनाव खर्च पार्टी खुद उठाएगी।

महिला और अति पिछड़ा वर्ग अब तक जदयू (JDU) का मजबूत वोट बैंक रहा है। नीतीश कुमार ने लगातार तीन चुनावों में इसी आधार पर जीत दर्ज की। लेकिन PK की यह रणनीति नीतीश के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन सकती है।

PK ने हाल ही में दावा किया था कि “जदयू को इस चुनाव में 25 से ज्यादा सीटें नहीं आएंगी।” हालांकि यह अतिशयोक्ति मानी जा रही है, लेकिन इतना तय है कि जन सुराज की सक्रियता से जदयू को नुकसान जरूर हो सकता है।


जनता की नब्ज़ पर हाथ?

प्रशांत किशोर लगातार गाँव-गाँव जाकर जनसंवाद यात्रा के जरिए जनता से जुड़ रहे हैं। उनके मुद्दे—शिक्षा, स्वास्थ्य, बेरोज़गारी और सामाजिक न्याय—जनता को आकर्षित कर रहे हैं। अभी तक यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि PK कितनी सीटें जीत पाएंगे, लेकिन यह साफ है कि उनका 10% वोट शेयर कई दलों की उम्मीदों पर पानी फेर सकता है।


? निष्कर्ष:
2020 में चिराग पासवान ने भले केवल 1 सीट जीती थी, लेकिन 54 सीटों पर हार-जीत का समीकरण पलट दिया था। अब 2025 में प्रशांत किशोर भी कुछ वैसा ही करते दिख रहे हैं। उनकी एंट्री से न लालू यादव चैन से हैं और न नीतीश कुमार।

Views: 187