नई दिल्ली, 10 अगस्त 2025:
देश की मेडिकल शिक्षा प्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने 2024-25 के शैक्षणिक सत्र में MBBS एडमिशन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं पाए जाने की पुष्टि की है।
NMC के अंडरग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन बोर्ड (UGMEB) की जांच में सामने आया कि कुछ मेडिकल कॉलेजों ने ऐसे छात्रों के नाम दाखिल किए हैं जिनकी स्टूडेंट आईडी तक मौजूद नहीं है।
इस मामले को और भी गंभीर बनाता है यह तथ्य कि सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) पहले से ही NMC में कथित भ्रष्टाचार की जांच कर रही है। इसी संदर्भ में यह एडमिशन ऑडिट भी शुरू किया गया था।
? क्या है पूरा मामला?
- कई कॉलेजों ने फर्जी या अधूरी जानकारी के साथ छात्रों का एडमिशन दिखाया।
- कुछ मामलों में ऐसे नाम दर्ज हैं जो आधिकारिक रिकॉर्ड में हैं ही नहीं।
- NMC ने एक पब्लिक नोटिस जारी कर उन एंट्री नंबरों की सूची प्रकाशित की है जहां ये अनियमितताएं पाई गई हैं।
? सभी कॉलेजों को चेतावनी
NMC ने देश के सभी मेडिकल कॉलेजों को तत्काल स्टूडेंट डेटा वेरिफिकेशन का आदेश दिया है। किसी भी तरह की गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित कॉलेज के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है — जिसमें मान्यता रद्द करने तक के कदम शामिल हैं।
? सिस्टम की खामियां या सुनियोजित धांधली?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित फर्जीवाड़ा हो सकता है। मेडिकल शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह की गतिविधियां न केवल शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं, बल्कि रोगियों की सुरक्षा को भी खतरे में डालती हैं।
? आगे क्या?
- NMC अब डिजिटल स्टूडेंट ट्रैकिंग सिस्टम को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।
- कॉलेजों से जवाब मांगे गए हैं, और जिन संस्थानों की ओर से संतोषजनक सफाई नहीं मिलेगी, उनके खिलाफ CBI जांच की सिफारिश की जा सकती है।
निष्कर्ष:
भारत में मेडिकल शिक्षा की पारदर्शिता पर यह एक बड़ा सवाल है। आने वाले हफ्तों में इस पर और खुलासे संभव हैं। फिलहाल छात्रों और अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने संस्थानों से पूरी जानकारी लें और अपने रिकॉर्ड्स की जांच अवश्य करें।
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