तेजस्वी यादव का पलटवार: “हम जो कहते हैं, वो करते हैं” — मांझी के व्यंग्य पर बोला तीखा हमला, कहा NDA सिर्फ़ मलाई खाने में व्यस्त

तेजस्वी यादव का पलटवार: “हम जो कहते हैं, वो करते हैं” — मांझी के व्यंग्य पर बोला तीखा हमला, कहा NDA सिर्फ़ मलाई खाने में व्यस्त

पटना, 10 अक्टूबर:
बिहार की राजनीति में बयानबाज़ी का दौर तेज़ हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी द्वारा लालू परिवार और राजद पर किए गए तंज के बाद अब तेजस्वी यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। मांझी ने हाल ही में कहा था कि “लालू परिवार की सत्ता के प्रति बौखलाहट देखकर ऐसा लगता है कि तेजस्वी यादव अगले प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह घोषणा करेंगे कि यदि बिहार में राजद की सरकार बनी तो हर परिवार के एक सदस्य को चाँद और मंगल ग्रह पर चार कठ्ठे का फ़ार्महाउस दिया जाएगा।”

मांझी यहीं नहीं रुके, उन्होंने व्यंग्य भरे लहजे में कहा, “बेटा ललटेनवा… गदहा चाहे कितनी कोशिश कर ले, ओकर सिर पर सिंग नहीं निकल सकता, बूझे…” उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई। एनडीए समर्थकों ने इसे हास्य के रूप में लिया, जबकि राजद नेताओं ने इसे “बेतुका और असम्मानजनक” करार दिया।

इस व्यंग्य पर तेजस्वी यादव ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में जवाब देते हुए कहा, “हम (राजद) जो कहते हैं, वो करते हैं। हमारी 17 महीने की सरकार इसका उदाहरण है — हमने 5 लाख नौकरियाँ देकर खुद को साबित किया है। NDA के घटक दल सिर्फ मलाई खाने में लगे हैं। उन्होंने अपने आत्म-सम्मान को बेच दिया है और बिहार को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ी।”

तेजस्वी ने आगे कहा कि उनकी राजनीति जनता के विश्वास और युवाओं के भविष्य पर आधारित है। “हम वादे नहीं, काम करते हैं। जब हमें मौका मिला, हमने रोजगार दिया, मेडिकल कॉलेजों का विस्तार किया, और किसानों के लिए राहत योजनाएँ शुरू कीं। लेकिन एनडीए सरकार ने सिर्फ़ घोषणाएँ कीं और बिहार के युवाओं के सपनों को कुचल दिया।”

उन्होंने मांझी पर अप्रत्यक्ष रूप से कटाक्ष करते हुए कहा कि “कुछ लोग सत्ता में बने रहने के लिए किसी भी गठबंधन में चले जाते हैं। ऐसे लोग न तो अपने विचारों पर टिके हैं, न जनता के प्रति जवाबदेह। उनकी राजनीति केवल बयानबाज़ी और व्यक्तिगत लाभ तक सीमित है।”

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मांझी का बयान व्यंग्यात्मक जरूर था, लेकिन उसने बिहार की चुनावी राजनीति में नई गर्मी पैदा कर दी है। दूसरी ओर, तेजस्वी का जवाब यह संकेत देता है कि वे अब हर टिप्पणी का राजनीतिक फायदा उठाने के मूड में हैं।

तेजस्वी यादव ने यह भी कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में जनता “वादों की राजनीति” और “काम की राजनीति” के बीच फर्क पहचान चुकी है। उन्होंने कहा, “बिहार के युवाओं को झूठे सपने नहीं चाहिए। उन्हें नौकरी, शिक्षा, और सम्मान चाहिए — और यही हम देंगे।”

मांझी और तेजस्वी के बीच यह बयानबाज़ी आने वाले समय में महागठबंधन और एनडीए के बीच राजनीतिक टकराव को और गहराएगी। दोनों पक्ष चुनाव से पहले अपनी-अपनी छवि मजबूत करने में जुटे हैं।
राजद ने इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर भी जवाबी मुहिम शुरू की है, जिसमें “हम करते हैं” स्लोगन के साथ तेजस्वी की पूर्व सरकार की उपलब्धियाँ गिनाई जा रही हैं।

बिहार की सियासत में व्यंग्य और कटाक्ष कोई नई बात नहीं, लेकिन इस बार के बयान ने यह साफ़ कर दिया है कि आने वाले चुनावों में मुद्दों के साथ-साथ शब्दों की लड़ाई भी बराबरी से लड़ी जाएगी।

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