भारत के उपराष्ट्रपति: संवैधानिक अधिकार और भूमिका

भारत के उपराष्ट्रपति: संवैधानिक अधिकार और भूमिका
  1. उपराष्ट्रपति का संवैधानिक स्थान

भारत के संविधान के अनुच्छेद 63 में प्रावधान है कि “भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा।”

उपराष्ट्रपति, देश का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है।

वह राज्यसभा के पदेन (ex-officio) सभापति होते हैं।


  1. राष्ट्रपति बनाम उपराष्ट्रपति

आधार राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति

चुनाव संसद और राज्यों की विधानसभाओं द्वारा अप्रत्यक्ष चुनाव केवल सांसदों (लोकसभा + राज्यसभा) द्वारा अप्रत्यक्ष चुनाव
पद की भूमिका राष्ट्र प्रमुख, तीनों सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर, कार्यपालिका प्रमुख राज्यसभा के सभापति, कार्यपालिका का कोई स्वतंत्र अधिकार नहीं
कार्यकाल 5 वर्ष
उत्तराधिकार राष्ट्रपति के पद रिक्त होने पर उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति बनते हैं राष्ट्रपति बनने की स्थिति में नया उपराष्ट्रपति चुना जाता है
हटाने की प्रक्रिया महाभियोग (जटिल प्रक्रिया) राज्यसभा में साधारण बहुमत से हटाया जा सकता है


  1. उपराष्ट्रपति की प्रमुख शक्तियाँ व कर्तव्य
  2. राज्यसभा की अध्यक्षता करना और उसकी कार्यवाही को नियंत्रित करना।
  3. राष्ट्रपति के पद रिक्त होने पर कार्यवाहक राष्ट्रपति बनना।
  4. सदन में टाई की स्थिति आने पर निर्णायक वोट देना।
  5. संसदीय परंपराओं को बनाए रखना और दलों के बीच संतुलन कायम रखना।

  1. चुनाव प्रक्रिया

मतदान गुप्त बैलेट द्वारा किया जाता है।

मतगणना प्राथमिकता क्रम (Single Transferable Vote) प्रणाली से होती है।

केवल सांसद (लोकसभा और राज्यसभा) वोट डालते हैं, राज्य विधानसभाएँ इसमें शामिल नहीं होतीं।


  1. इतिहास की झलक

पहले उपराष्ट्रपति: डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन (1952–1962)।

सबसे लंबे कार्यकाल वाले: भैरोसिंह शेखावत और हामिद अंसारी (दो-दो बार निर्वाचित)।

अब तक अधिकांश उपराष्ट्रपति बाद में राष्ट्रपति भी बने हैं (जैसे डॉ. राधाकृष्णन, डॉ. जाकिर हुसैन, आर. वेंकटरामन, शंकर दयाल शर्मा, कृष्णकांत, भैरोंसिंह शेखावत नहीं बने

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