भारत ने 2025 में 25 गीगावाट (GW) नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़कर अपने स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह वृद्धि देश की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को 200 GW से अधिक कर देती है, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर स्थायी ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बनता जा रहा है। इस उपलब्धि ने यह स्पष्ट कर दिया है कि देश हरित ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में गंभीरता से आगे बढ़ रहा है।
सरकारी अधिकारियों ने बताया कि नई क्षमता का लगभग 80% सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं से आया है। राजस्थान, गुजरात और तमिलनाडु जैसे राज्यों ने इस वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इन राज्यों में सौर और पवन ऊर्जा संयंत्रों का तेजी से विकास हुआ है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन परियोजनाओं ने न केवल ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि की है बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहित किया है।
MNRE सचिव अनन्या मेहता ने कहा, “यह उपलब्धि भारत के हरित भविष्य के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। हमारी सौर और पवन परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित करने से कार्बन उत्सर्जन कम होगा और साथ ही देश में हजारों नए रोजगार भी सृजित होंगे।” उन्होंने यह भी बताया कि सरकार हर राज्य में अधिक ऊर्जा दक्ष और टिकाऊ परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने के लिए योजनाएँ बना रही है।
उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अपनी 2030 की नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य को निर्धारित समय से पहले ही हासिल करने की दिशा में अग्रसर है। इसके लिए सरकार ने ऑफ़शोर विंड फार्म, ऊर्जा भंडारण समाधान और ग्रीन हाइड्रोजन तकनीकों में भी निवेश बढ़ाया है। ये पहलें न केवल ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देंगी बल्कि देश के निर्यात क्षेत्र में भी योगदान देंगी।
सौर ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना में बढ़ोतरी ने विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर प्रदान किए हैं। किसान और स्थानीय श्रमिक अब ऊर्जा क्षेत्र में अपने कौशल का उपयोग कर स्थायी आय अर्जित कर सकते हैं। पवन ऊर्जा क्षेत्र में भी नौकरियों की संख्या में वृद्धि हुई है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।
इस रिकॉर्ड वृद्धि का प्रभाव केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं है। यह देश की जलवायु परिवर्तन नीतियों, आर्थिक विकास और वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारत की स्थिति को भी मजबूत करती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की परियोजनाओं से भारत को वैश्विक निवेशकों का ध्यान आकर्षित करने में मदद मिलेगी और देश की अर्थव्यवस्था और अधिक सशक्त होगी।
इस तरह की उपलब्धियाँ यह दर्शाती हैं कि भारत सतत ऊर्जा, हरित तकनीक और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में से एक बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। 2025 में प्राप्त यह रिकॉर्ड न केवल ऊर्जा उत्पादन का प्रतीक है बल्कि भारत के भविष्य की हरित और समृद्ध दिशा की भी पुष्टि करता है।
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